राह दिखा दे वही तारा न रहा!

शाम तन्हाई की है आएगी मंज़िल कैसे,
जो मुझे राह दिखा दे वही तारा न रहा|

मजरूह सुल्तानपुरी

2 responses to “राह दिखा दे वही तारा न रहा!”

  1. वाह, बहुत सुंदर गीत |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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