राह जिसकी कोई मंज़िल न हो!

हैं रवाँ उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल न हो,
जुस्तुजू करते हैं उसकी जो हमें हासिल न हो|

मुनीर नियाज़ी

2 responses to “राह जिसकी कोई मंज़िल न हो!”

  1. वाह वाह , बहुत सुंदर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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