वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ!

ख़ुद को माज़ी में रखूँ हाल में रहते हुए भी,
नए वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ|

राजेश रेड्डी

2 responses to “वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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