सहनशीलता!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी हास्य कविता सम्राट माने जाने वाले स्वर्गीय काका हाथरसी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| ये कविता उनके जीवन काल की है तो ज़ाहिर है इसमें की गए संदर्भ भी उस समय के ही हैं|

लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय काका हाथरसी जी की यह कविता –


साहब हो गए 58 पर रिटायर
क्योंकि, कानून की दृष्टि में
उनकी बुद्धि हो गई थी ऐक्सपायर
लेकिन हमारे सिर पर सवार हैं-
साठोत्तर प्रधानमंत्री और 81 वर्षीय राष्ट्रपति
वे क्यों नहीं होते रिटायर ?
चुप रहो, तुम नहीं जानते इसका कारण,
यह है हमारी सहनशीलता का प्रत्यक्ष उदाहरण
नेताओं की भाँति कवि और शायर भी कभी नहीं होते रिटायर।
अपन 85 में चल रहे हैं, फिर भी कविता लिख रहे हैं।
इस उम्र में भी काका पर फिदा हैं आकाशवाणी और दूरदर्शन।


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “सहनशीलता!”

  1. वाह, बहुत सुंदर।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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