किताब के अंदर कहीं कहीं हूँ मैं!

वो इक किताब जो मंसूब तेरे नाम से है,
उसी किताब के अंदर कहीं कहीं हूँ मैं|

राहत इन्दौरी

2 responses to “किताब के अंदर कहीं कहीं हूँ मैं!”

  1. वाह वाह।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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