मगर क़ीमत ज़ियादा थी!

मयस्सर मुफ़्त में थे आसमाँ के चाँद तारे तक,
ज़मीं के हर खिलौने की मगर क़ीमत ज़ियादा थी|

राजेश रेड्डी

2 responses to “मगर क़ीमत ज़ियादा थी!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji

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