
समझते ही नहीं नादान कै दिन की है मिल्किय्यत,
पराए खेतों पे अपनों में झगड़ा होने लगता है|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

समझते ही नहीं नादान कै दिन की है मिल्किय्यत,
पराए खेतों पे अपनों में झगड़ा होने लगता है|
वसीम बरेलवी
Leave a reply to shri.krishna.sharma Cancel reply