भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे!

क्या हुस्न है जमाल है क्या रंग-रूप है,
वो भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे|

कृष्ण बिहारी नूर

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