तिरी बालियाँ तिरे हार लूँ!

अगर आसमाँ की नुमाइशों में मुझे भी इज़्न-ए-क़याम हो,
तो मैं मोतियों की दुकान से तिरी बालियाँ तिरे हार लूँ|

बशीर बद्र

2 responses to “तिरी बालियाँ तिरे हार लूँ!”

  1. वाह वाह।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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