सुना भी नहीं देखा भी नहीं!

अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं,
तूने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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