आज एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद घर वापसी हो गई, टाइफाइड का बुखार जिसने पहले एक सप्ताह तक घर पर परेशान किया, बाद में टेस्ट कराने पर उसकी पुष्टि हुई अन्यथा शुरू में मैं इसको वायरल फीवर मानते हुए ही गंभीरता से नहीं ले रहा था|

खैर बहुत दिनों से अस्पताल में भर्ती होने की ख्वाहिश भी थी, वरना जहां तक मेरी जानकारी है, मेरा आना-जाना ओपीडी तक था और वह भी पिछले कुछ वर्षों से ही|
अस्पताल में अंतरंग रोगी बनने की बात हो तो गुड़गांव में रहते हुए दिल्ली के अपोलो अस्पताल में दोनों आँखों ऑपरेशन कराया, जिसके लिए दो बार एक-एक दिन के लिए भर्ती हुआ, एक आँख के लिए 1 लाख और दूसरी के लिए इससे से थोड़ा अधिक मेरी कंपनी को भुगतान करना पड़ा था| इस बार एक सप्ताह तक भर्ती रहने पर लगभग डेढ़ लाख रुपया खर्च आया|
हाँ तो अस्पताल में वास्तव में भर्ती , इससे पहले मैं तब हुआ था जब मैं 12 वीं कक्षा में पढ़ रहा था, दिल्ली-शाहदरा में रहते हुए शाहदरा के जनरल अस्पताल में शायद 3 दिन तक भर्ती रहा था और तब भी शायद टाइफाइड ही हुआ था| उस समय का खर्च तो वैसे भी पता नहीं लेकिन तब सस्ता ज़माना था और वह सरकारी अस्पताल था| उसके बाद कभी अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा था, अब से पहले|
आज के लिए यही बस अपनी बीमारी का गुणगान जिसके कारण ब्लॉगिंग में एक सप्ताह का गैप तो आ ही गया|
नमस्कार|
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