जलती है सहर होते तक!

ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़मर्ग इलाज,
शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक |

मिर्ज़ा ग़ालिब

2 responses to “जलती है सहर होते तक!”

  1. बहुत सुंदर

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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