
ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़मर्ग इलाज,
शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक |
मिर्ज़ा ग़ालिब
A sky full of cotton beads like clouds

ग़म-ए-हस्ती का ‘असद’ किस से हो जुज़मर्ग इलाज,
शम्अ हर रंग में जलती है सहर होते तक |
मिर्ज़ा ग़ालिब
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