मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार!

करें मिलावट फिर न क्यों व्यापारी व्यापार,
जबकि मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार|

गोपाल दास नीरज

One response to “मिलावट से बने रोज़ यहाँ सरकार!”

  1. बहुत सुंदर।

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