यहीं आके फिसलते क्यों हैं!

मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए,
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं|

राहत इन्दौरी

2 responses to “यहीं आके फिसलते क्यों हैं!”

  1. वाह वाह।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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