मुझको चुनवा दो दीवारों में!

लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में।
मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में।

नक़्श लायलपुरी

2 responses to “मुझको चुनवा दो दीवारों में!”

  1. वाह, बहुत खूब |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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