हर निगाह ख़रीदार की तरह!

हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह,
उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह|

मजरूह सुल्तानपुरी

2 responses to “हर निगाह ख़रीदार की तरह!”

  1. बहुत सुंदर गीत |

    Like

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      जी, हार्दिक धन्यवाद।

      Like

Leave a comment