उस झोली को फैलाना क्या!

इस दिल के दरीदा दामन को देखो तो सही सोचो तो सही।
जिस झोली में सौ छेद हुए उस झोली को फैलाना क्या॥

इब्ने इंशा

2 responses to “उस झोली को फैलाना क्या!”

  1. बहुत सुंदर

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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