क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे!

इन चिराग़ों में तेल ही कम था,
क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे|

जावेद अख़्तर

2 responses to “क्यों गिला फिर हमें हवा से रहे!”

  1. बहुत सुंदर

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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