आज स्वर्गीय सुदर्शन फ़ाकिर जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| सुदर्शन फ़ाकिर जी ने कुछ बहुत सुंदर रचनाएं हमें दी हैं| जगजीत सिंह जी और अन्य अनेक गायकों ने फ़ाकिर जी की रचनाओं को गाया है|
लीजिए आज प्रस्तुत है सुदर्शन फ़ाकिर जी की एक बहुत लोकप्रिय और प्रभावशाली ग़ज़ल, इस ग़ज़ल को भी जगजीत सिंह और चित्रा सिंह की जोड़ी ने गाया था–

दिल की दीवार-ओ-दर पे क्या देखा,
बस तेरा नाम ही लिखा देखा|
तेरी आँखों में हमने क्या देखा,
कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा|
अपनी सूरत लगी पराई सी,
जब कभी हमने आईना देखा|
हाय अंदाज़ तेरे रुकने का,
वक़्त को भी रुका रुका देखा|
तेरे जाने में और आने में,
हमने सदियों का फ़ासला देखा|
फिर न आया ख़याल जन्नत का,
जब तेरे घर का रास्ता देखा|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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