अपनी ही ख़ुद परछाइयाँ हैं!

है ऐसी तेज़ रफ़्तारी का आलम,
कि लोग अपनी ही ख़ुद परछाइयाँ हैं|

सूर्यभानु गुप्त

2 responses to “अपनी ही ख़ुद परछाइयाँ हैं!”

  1. बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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