
मिलते रहे दुनिया से जो ज़ख्म मेरे दिल को,
उनको भी समझकर मैं सौग़ात, बरतता हूँ ।
राजेश रेड्डी
A sky full of cotton beads like clouds

मिलते रहे दुनिया से जो ज़ख्म मेरे दिल को,
उनको भी समझकर मैं सौग़ात, बरतता हूँ ।
राजेश रेड्डी
Leave a reply to shri.krishna.sharma Cancel reply