चंदन है तो महकेगा ही!

एक बार फिर से मैं आज स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रमानाथ अवस्थी जी एक श्रेष्ठ गीतकार थे और उन्होंने मन की कोमल भावनाओं को हमेशा बहुत सुंदर तरीके से व्यक्त किया है|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत –


चंदन है तो महकेगा ही
आग में हो या आँचल में|

छिप न सकेगा रंग प्यार का
चाहे लाख छिपाओ तुम
कहने वाले सब कह देंगे
कितना ही भरमाओ तुम
घुंघरू है तो बोलेगा ही
सेज में हो या साँकल में|

अपना सदा रहेगा अपना
दुनिया तो आनी जानी
पानी ढूँढ़ रहा प्यासे को
प्यासा ढूँढ़ रहा पानी
पानी है तो बरसेगा ही
आँख में हो या बादल में|


कभी प्यार से कभी मार से
समय हमें समझाता है
कुछ भी नहीं समय से पहले
हाथ किसी के आता है
समय है तो वह गुज़रेगा ही
पथ में हो या पायल में|

बड़े प्यार से चाँद चूमता
सबके चेहरे रात भर
ऐसे प्यारे मौसम में भी
शबनम रोई रात भर
दर्द है तो वह दहकेगा ही
घन में हो या घानल में|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “चंदन है तो महकेगा ही!”

  1. बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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  2. बहुत ही सुंदर और गहरी पंक्तियाँ ❤

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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