नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है!

नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है,
उनकी आग़ोश में सर हो ये ज़रूरी तो नहीं |

ख़ामोश ग़ाज़ीपुरी

2 responses to “नींद तो दर्द के बिस्तर पे भी आ सकती है!”

  1. वाह वाह, , बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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