शीशे के झरोखों से सजाया न करो!

शहर-ए-एहसास में पथराव बहुत है मोहसिन,
दिल को शीशे के झरोखों से सजाया न करो|

मोहसिन नक़वी

2 responses to “शीशे के झरोखों से सजाया न करो!”

  1. वाह, बेहद खुबसूरत |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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