जब चली सर्द हवा!

आज दिल की चोटों, दिल टूटने आदि को लेकर कुछ शेर, गीत पंक्तियाँ शेयर करूंगा, शुरुआत जोश मलीहाबादी जी के एक शेर से-



दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,
जब चली सर्द हवा, मैंने तुझे याद किया|

4 responses to “जब चली सर्द हवा!”

  1. बहुत सुन्दर |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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  2. दर्द दिल का हो तो कोई मरहम भी काम नही आता
    दर्द की इंतहा तो देखिए, मर के भी साथ जाता है

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत सही कहा आपने।

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