
मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये को
बदन मेरा ही सही दोपहर न भाये मुझे।
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये को
बदन मेरा ही सही दोपहर न भाये मुझे।
क़तील शिफ़ाई
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