वो भी न बन सका अपना!

सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना,
क़ुबूल हमने किया जिसका गम खुशी की तरह।

क़तील शिफाई

2 responses to “वो भी न बन सका अपना!”

  1. वाह वाह..

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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