आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| मजरूह सुल्तानपुरी साहब का लिखा यह गीत मुकेश जी और लता जी ने फिल्म- ‘फिल्म पत्थर के सनम’ के लिए गाया था, इसका संगीत तैयार किया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की सुरीली जोड़ी ने|
लीजिए प्रस्तुत है मनोज कुमार जी और वहीदा जी पर फिल्माया गया यह गीत जो इतने समय बाद आज भी बड़े चाव से सुना जाता है –

महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं हैं
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है|
तू हो तो बढ़ जाती है कीमत मौसम की
ये जो तेरी आंखें हैं शोला शबनम की
यहीं मरना भी है मुझको
मुझे जीना भी यहीं है|
महबूब मेरे महबूब मेरे|
अरमां जिसको जन्नत की रंगीं गलियों का
उसको तेरा दामन है बिस्तर कलियों का
जहां पर हैं तेरी बाहें
मेरी जन्नत भी वही है
महबूब मेरे महबूब मेरे|
रख दे मुझको तू अपना दीवाना करके
नज़दीक आ जा फिर देखूं तुझको जी भर के
मेरे जैसे होंगे लाखों, कोई भी तुझसा नहीं हैं
महबूब मेरे महबूब मेरे|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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