आज किशोर कुमार जी द्वारा स्वयं निर्मित फिल्म – ‘दूर गगन की छाँव में’ के लिए उनके ही द्वारा गाया गया एक गीत शेयर कर रहा हूँ, इस गीत का संगीत भी किशोर कुमार जी ने ही दिया है और इसमें उनके पुत्र अमित कुमार की भी आवाज है|
कुल मिलाकर ये एक बहुत सुंदर और आशावादी गीत है, लीजिए प्रस्तुत है ये गीत-

आ चल के तुझे मैं लेके चलूँ एक ऐसे गगन के तले,
जहाँ ग़म भी ना हो, आँसू भी ना हो, बस प्यार ही प्यार पले|
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सूरज की पहली किरण से आशा का सवेरा जागे
चंदा की किरण से धुलकर घनघोर अंधेरा भागे,
कभी धूप खिले, कभी छाँव मिले, लंबी सी डगर ना खले|
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जहाँ दूर नज़र दौड़ाएं, आज़ाद गगन लहराये
जहाँ रंगबिरंगे पंछी आशा का संदेसा लाये,
सपनों में पली, हँसती हो कली, जहाँ शाम सुहानी ढले|
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सपनों के ऐसे जहां में, जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो
हम जा के वहाँ खो जाएं, शिकवा ना कोई गीला हो,
कहीं बैर ना हो, कोई गैर ना हो, सब मिल के यूँ चलते चलें|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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