पिता के नाम

आज फिर से अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट संपादित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ| यद्यपि इसे प्रस्तुत करने मेँ थोड़ी देरी हो गई है|

पितृ दिवस के अवसर पर, मैं अपने पूज्य पिताजी का स्मरण करते हुए इस पोस्ट को शेयर कर रहा हूँ, जिनके पास उपलब्धियों के नाम पर कुछ बताने लायक नहीं था, सिर्फ अनवरत संघर्ष और विशेष रूप मेरे लिए अथाह प्रेम| अब प्रस्तुत है वह पोस्ट|

मैंने अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ।

एक बात और, मैं हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका प्रकाशन/ प्रसारण भी हमेशा इसी नाम से हुआ, नवगीत से संबंधित पुस्तकों/ शोध ग्रंथों में भी मेरा उल्लेख इसी नाम से आया है, लेकिन अब जबकि मालूम हुआ कि इस नाम से कविताएं आदि लिखने वाले कम से कम दो और रचनाकार रहे हैं, इसलिए अब मैं अपनी कविताओं को पहली बार श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ नाम से प्रकाशित कर रहा हूँ, जिससे एक अलग पहचान बनी रहे।

लीजिए आज इस क्रम की इस दूसरी पोस्ट में दो और रचनाओं को शेयर कर रहा हूँ-


पिता के नाम


-श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’

हे पिता
यदि हो कहीं, तो क्या लिखूं तुमको
बस यही, जो जिस तरह था
उस तरह ही है।

पत्र है अभिवादनों की शृंखला केवल
हम अभी जीवित बचे हैं, यह बताने को,
और आश्वासन इसी अनुरूप पाने को,
मैं न मानूं किंतु प्रचलन
इस तरह ही है।

हाल अपना क्या सुनाऊं, ठीक सा ही है,
गो कि अदना क्लर्क–
कल का महद आकांक्षी,
ओस मे सतरंगदर्शी बावला पंछी–
हो गया है, मुदित सपना, आपके मन का
जी रहा है, और जीवन
उस तरह ही है।

साथ हैं अब कुछ वही एहसास सपनीले-
वह फिसलने फर्श पर मेरा रपट जाना,
और चिंता से तुम्हारा आंख भर लाना,
बीच सड़कों, धुएं, ट्रैफिक के गिरा हूँ मैं
और यह ध्यानस्थ दुनिया-
उस तरह ही है।


और यह दूसरी कविता, बेरोजगारी के दिनों के अनुभव पर आधारित-


इंद्रधनुष सपनों को, पथरीले अनुभव की
ताक पर धरें,
आओ हम तुम मिलकर, रोज़गार दफ्तर की
फाइलें भरें।

गर्मी में सड़कों का ताप बांट लें,
सर्दी में पेड़ों के साथ कांप लें,
बूंद-बूंद रिसकर आकाश से झरें।
रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें॥


ढांपती दिशाओं को, हीन ग्रंथियां,
फूटतीं ऋचाओं सी मंद सिसकियां।
खुद सुलगे पिंड हम, आग से डरें।
रोज़गार दफ्तर की
फाइलें भरें।


–-श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’


आज के लिए इतना ही,
आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है।
नमस्कार।
********

4 responses to “पिता के नाम”

  1. बहुत सुन्दर…

    Like

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      धन्यवाद जी।

      Like

  2. Beautiful verses

    Like

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

      Like

Leave a reply to vermavkv Cancel reply