फिर भी हम अकेले हैं!

आज एक गीत शेयर कर रहा हूँ जो सबा अफ़गानी जी का लिखा हुआ है और जहां तक मुझे याद था, मैंने इसे बहुत पहले अनूप जलोटा जी की आवाज में सुना था, लेकिन अब मालूम हुआ की ये टी सीरीज़ की ओर से ‘कसम तेरी कसम’ की एल्बम के लिए सोनू निगम जी की आवाज में रिकॉर्ड किया गया है और इसका संगीत दिया है- नरेश शर्मा जी ने|

खैर मुझे इस गीत के बोल बहुत अच्छे लगते हैं और ये भी आज की ज़िंदगी की एक सच्चाई है| लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-

ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|
भीड़ हैं क़यामत की
फिर भी हम अकेले हैं|

ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|


आईने के सौ टुकड़े
हमने करके देखा है|
एक में भी तनहा थे
सौ में भी अकेले हैं|


ज़िन्दगी की राहों में
रंजो ग़म के मेले हैं|


जब शबाब आया है
आँख क्यों चुराते हो,
बचपन में हम और तुम
साथ साथ खेले हैं|

भीड़ हैं क़यामत की
और हम अकेले हैं|


गेसुओं के साये में
एक शब गुज़ारी थी,
आपसे जुदा हो के
आज तक अकेले हैं|

ज़िन्दगी की राहों में,
रंजो ग़म के मेले हैं|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “फिर भी हम अकेले हैं!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot Yagnesh ji.

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  1. Beautiful lines sirji

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

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