राजे ने अपनी रखवाली की!

छायावाद युग के स्तंभ रहे महाकवियों की एक रचनाएं शेयर करने के क्रम में मैं आज स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| निराला जी अपने युग से बहुत आगे के कवि थे और उनकी रचना ‘राम की शक्तिपूजा’ एक कालजयी रचना है| निराला जी को उनकी उदारता और फक्कड़पन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है|


आज की इस रचना में उन्होंने सामंतशाही के वातावरण का वर्णन बहुत सुंदर तरीके से किया है –



राजे ने अपनी रखवाली की;
किला बनाकर रहा;
बड़ी-बड़ी फ़ौजें रखीं ।
चापलूस कितने सामंत आए ।
मतलब की लकड़ी पकड़े हुए ।
कितने ब्राह्मण आए
पोथियों में जनता को बाँधे हुए ।


कवियों ने उसकी बहादुरी के गीत गाए,
लेखकों ने लेख लिखे,
ऐतिहासिकों ने इतिहास के पन्ने भरे,
नाट्य-कलाकारों ने कितने नाटक रचे
रंगमंच पर खेले ।
जनता पर जादू चला राजे के समाज का ।


लोक-नारियों के लिए रानियाँ आदर्श हुईं ।
धर्म का बढ़ावा रहा धोखे से भरा हुआ ।
लोहा बजा धर्म पर, सभ्यता के नाम पर ।
ख़ून की नदी बही ।


आँख-कान मूंदकर जनता ने डुबकियाँ लीं ।
आँख खुली– राजे ने अपनी रखवाली की ।



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “राजे ने अपनी रखवाली की!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Very Happy Holi to you too.

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