दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!

आज ‘इंडियन आइडल’ के एक ताज़ा एपिसोड को देखने के अनुभव को शेयर करना चाहूँगा| इस प्रोग्राम में अनेक युवा प्रतिभाएँ आती हैं, युवक-युवतियाँ हो गायन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर कुछ पाना चाहते हैं| इस प्रोग्राम में कुछ प्रतिष्ठित गायक, संगीतकार आदि निर्णायकों के रूप में और संगीत के क्षेत्र की कुछ बड़ी हस्तियाँ विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित होती हैं|


एक उम्मीद इस कार्यक्रम के माध्यम से युवा गायक-गायिकाओं में पैदा होती है कि यहाँ प्राप्त अनुभव और अर्जित नाम के बल पर वे संगीत की दुनिया में अपना स्थान बना पाएंगे| अच्छी बात है उम्मीद पर दुनिया कायम है, यद्यपि हम जानते हैं कि ‘इंडियन आइडल’ के कितने प्रोग्राम अब तक हो चुके हैं और इनके माध्यम से कितने लोग संगीत की दुनिया में अपना स्थान बना पाए हैं!


हाल ही के जिस एपिसोड का अनुभव मैं शेयर कर रहा हूँ, उसमें लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की प्रसिद्ध जोड़ी के सदस्य प्यारेलाल जी शामिल हुए थे और उनके संगीतबद्ध किए गए गीत प्रतिभागियों ने गाकर सुनाए, और हमेशा की तरह इन युवा प्रतिभाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी|


विशेष बात जिसका उल्लेख मैं करना चाहूँगा, और वास्तव में इसे देखकर धक्का भी लगा, वह थी प्रसिद्ध फिल्मी गीतकार – संतोषानंद जी का इस प्रोग्राम में आना| उनके बारे में काफी पहले यह तो सुना था कि उनका बेटा किसी बड़ी आर्थिक परेशानी में फंस गया था और यह मुझे याद नहीं था कि उनके बेटे और बहू ने आत्महत्या कर ली थी|


मैंने संतोषानंद जी को उनके शुरू के दिनों से ही दिल्ली में देखा है, उनको दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी के अपने कार्यक्रमों में और अन्य आयोजनों में भी आमंत्रित किया था और बहुत बाद में एनटीपीसी अपने आयोजन में भी बुलाया था|


एक बात तो मैं जानता हूँ कि शायद शुरू से ही संतोषानंद जी कभी अपने पैरों पर सीधे नहीं चल पाए, वे हमेशा से छड़ी लेकर चलते रहे और उनके साथ दुर्घटनाएँ भी होती रहीं, लेकिन इस कार्यक्रम में वे व्हीलचेयर पर जिस स्थिति में आए, उसे देखकर दिल दुखी हुआ, लकवा हो जाने के बाद और अपनी दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण, उनको देखकर लगा कि जैसे उस कुर्सी पर कोई बच्चा बिलख रहा या पुलक रहा हो|


एक बात और जिसने मुझे इस कार्यक्रम निर्णायक मण्डल में से एक- सुश्री नेहा कक्कड़ का मुरीद बना दिया| जी हाँ, कलाकार तो बहुत से होते हैं, परंतु नेहा जी जिस प्रकार संतोषानंद जी की दयनीय आर्थिक स्थिति के बारे में जानकर, जिस प्रकार द्रवित हो गईं, उनके आँसू रुक नहीं रहे थे और उन्होंने संतोषानंद जी के मना करने पर भी, जिस प्रकार आग्रह पूर्वक, खुद को उनकी पोती के रूप में प्रस्तुत करते हुए पाँच लाख रुपये की भेंट की, वह वास्तव में उनकी विशाल हृदयता का परिचय देता है|


आज संतोषानंद जी की इन गीत पंक्तियों को दोहराते हुए यही कामना करता हूँ कि उनका शेष जीवन सुख से बीते और ईश्वर नेहा जी को उनके इस नेक काम के लिए यश और धन से भरपूर जीवन दे|

एक प्यार का नगमा है
मौजों की रवानी है,
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं
तेरी मेरी कहानी है|


कुछ पाकर खोना है
कुछ खोकर पाना है,
जीवन का मतलब तो
आना और जाना है|
दो पल के जीवन से
इक उम्र चुरानी है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!”

  1. bahut sundar song..

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Yes, very true.

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  2. ज़िन्दगी गुलज़ार है
    धन्यवाद जी।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

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