तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!

आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये शानदार गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘सहेली’ से है, जिसे लिखा है – इंदीवर जी ने और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|

जैसे जीवन में बहुत सी गतिविधियों का हमें कभी समापन करना पड़ जाता है, कभी ऐसी भी परिस्थिति आती है कि हमें प्रेम का भी समापन करना पड़ जाता है, यह गीत कुछ ऐसी ही परिस्थिति को बड़े प्रभावी ढंग से दर्शाता है|


लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

जिस दिल में बसा था प्यार तेरा
उस दिल को कभी का तोड़ दिया, हाय, तोड़ दिया
बदनाम न होने देंगे तुझे
तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा|

जब याद कभी तुम आओगे
समझेंगे तुम्हें चाहा ही नहीं
राहों में अगर मिल जाओगे
सोचेंगे तुम्हें देखा ही नहीं
जो दर पे तुम्हारे जाती थीं
उन राहों को हमने छोड़ दिया हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा
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हम कौन किसी के होते हैं
कोई हमको याद करेगा क्यूं
अपने दो आंसू भी हम पर
कोई बरबाद करेगा क्यूं – २
उस मांझी को भी गिला हमसे
मंझधार में जिसने छोड़ दिया, हाय, छोड़ दिया|
जिस दिल में बसा था प्यार तेरा …



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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4 responses to “तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!”

  1. बहुत सुन्दर गीत..

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Very true ji, thanks.

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

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