फ़ाइल के कोरे पन्ने भरते-भरते!


कविताओं के बारे में, एक बात कहना चाहूँगा, मैं यहाँ जो कविताएं शेयर करता हूँ, अधिकतर वे हमारे जमाने के कवियों की होती हैं, जो कवि सम्मेलनों में अपनी गीत-कविताओं के माध्यम से धूम मचाते थे| अब तो कवि सम्मेलनों का वैसा वातावरण नहीं रहा और मैं भी गोवा में हूँ, जहां ऐसी गतिविधियां देख-सुन पाना और भी मुश्किल है|

हाँ तो आज फिर से मैं कभी काव्य-मंचों के लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय बालस्वरूप राही जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने जीवन की, विशेष रूप से नौकरी-पेशा लोगों के जीवन की विसंगतियों का चित्रण किया गया है|

लीजिए आज प्रस्तुत कर रहा हूँ स्वर्गीय डॉ बालस्वरूप राही जी का यह गीत-


जो काम किया, वह काम नहीं आएगा,
इतिहास हमारा नाम नहीं दोहराएगा|
जब से सुरों को बेच ख़रीदी सुविधा,
तब से ही मन में बनी हुई है दुविधा|
हम भी कुछ अनगढा तराश सकते थे,
दो-चार साल अगर समझौता न करते ।


पहले तो हम को लगा कि हम भी कुछ हैं,
अस्तित्व नहीं है मिथ्या, हम सचमुच हैं|
पर अकस्मात ही टूट गया वह संभ्रम,
ज्यों बस आ जाने पर भीड़ों का संयम|
हम उन काग़जी गुलाबों से शाश्वत हैं,
जो खिलते कभी नहीं हैं, कभी न झरते ।


हम हो न सके जो हमें होना था,
रह गए संजोते वही कि जो खोना था|
यह निरुद्देश्य, यह निरानन्द जीवन-क्रम,
यह स्वादहीन दिनचर्या, विफल परिश्रम|
पिस गए सभी मंसूबे इस जीवन के,
दफ़्तर की सीढ़ी चढ़ते और उतरते ।


चेहरे का सारा तेज निचुड़ जाता है,
फ़ाइल के कोरे पन्ने भरते-भरते|
हर शाम सोचते नियम तोड़ देंगे हम,
यह काम आज के बाद छोड़ देंगे हम|
लेकिन वह जाने कैसी है मजबूरी,
जो कर देती है आना यहाँ ज़रूरी|

खाली दिमाग़ में भर जाता है कूड़ा,
हम नहीं भूख से, खालीपन से डरते ।


आज के लिए इतना ही
नमस्कार|


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2 responses to “फ़ाइल के कोरे पन्ने भरते-भरते!”

  1. Nitish Tiwary avatar
    Nitish Tiwary

    मैं तो कई साल से कविताएं लिख रहा हूँ। काव्य गोष्ठी में जाने का मौका भी मिलता है लेकिन खुद अपना रुपया लगाकर जाना पड़ता है। बड़े मंच की तलाश जारी है। वैसे साहित्य मेरे लिए पूजा से कम नहीं है। रुपया ना भी मिले तो भी साहित्य की इबादत जारी रहेगी।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Bilkul sahi hai ji, ab Manch kam hain aur log bahut hain, kuch ko hi mauka mil paata hai, ab patrikaaen bhi adhik nahi hain.

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