मेरे मित्र- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता ‘Entertainment Times’ by TOI द्वारा ऑनलाइन शेयर की गई कुछ कविताओं से लिया है, पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Friend’का भावानुवाद-

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता


मेरे मित्र


क्या तुम परदेस में हो, इस तूफानी रात में
प्रेम मार्ग पर अपनी यात्रा में मेरे दोस्त?
आकाश कराह रहा है, मानो निराश हो|


मेरी आँखों में आज रात नींद नहीं है|
बार-बार द्वार खोलकर बाहर देखती हूँ
घनघोर अंधेरे को, मेरे दोस्त!


मुझे अपने सामने कुछ दिखाई नहीं देता|
कहाँ गया वह तुम्हारा मार्ग!


पता नहीं स्याह काली नदी के किस धुंधले किनारे तुम चल रहे हो,
डरावने जंगलों के किस सुदूर छोर पर,
उदासी के किसी उलझे हुए जाल से होकर तुम तय कर रहे हो,
मेरे पास आने के लिए अपना रास्ता, मेरे मित्र?


-रवींद्रनाथ ठाकुर

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार पर मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

Friend



Art thou abroad on this stormy night
on thy journey of love, my friend?
The sky groans like one in despair.


I have no sleep tonight.
Ever and again I open my door and look out on
the darkness, my friend!


I can see nothing before me.
I wonder where lies thy path!


By what dim shore of the ink-black river,
by what far edge of the frowning forest,
through what mazy depth of gloom art thou threading
thy course to come to me, my friend?


-Rabindranath Tagore

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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4 responses to “मेरे मित्र- रवीन्द्रनाथ ठाकुर”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot.

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  1. Hello,
    it’s beautiful, I enjoy reading this poem
    thank you so much Krishna Sharma

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot dear.

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