144. बसंती पागल पवन – राज कपूर

आज एक बार फिर मेरे उस्ताद राज कपूर जी की याद आ रही है, फिल्म- ‘जिस देश में गंगा बहती है’ और उसके एक गीत के बहाने।

जबलपुर में जब भेड़ाघाट जाते हैं, तब वहाँ नाव वाले घुमाते हुए बताते हैं, कि यहाँ ‘मेरा नाम राजू’ गाने की शूटिंग हुई थी और यहाँ पद्मिनी ने ‘ओ बसंती पवन पागल’ गाया था।

आज यह गाना ही आपके साथ शेयर करूंगा, लेकिन उससे पहले ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के उस कैरेक्टर, उसको नायक किस प्रकार कहूं? राजू को याद कर लेता हूँ, जिसके लिए गंगा माई की कसम से बढ़कर कोई कसम नहीं है, जो डाकू के बच्चे को समझाता है कि उसके पिता की गर्दन लंबी हो जाएगी, जो कहता है-

मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है,

ज्यादा की नहीं परवाह हमको, थोड़े मे गुज़ारा होता है, 

बच्चों के लिए जो धरती मां, सदियों से सभी दुख सहती है, 

हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है। 

उस ऐसे इंसान के लिए नायिका पद्मिनी यह गीत गाती है, जो पुलिस को बताता है कि डाकू कहाँ हैं और फिर डाकुओं को बताता है कि पुलिस आ रही है, और इसमें कोई चालाकी नहीं है, एक भोलापन है, जो पागलपन के आसपास पहुंचा हुआ भोलापन है, ऐसा व्यक्ति , जब वह डाकुओं की बस्ती छोड़कर जा रहा था, तब उसको  संबोधित करते हुए उसकी प्रेमिका और एक डाकू की बेटी द्वारा गाए गए  इस गीत के बोल ध्यान से पढ़िए-

ओ बसंती पवन पागल, ना जा रे ना जा, रोको कोई 

बन के पत्थर हम पड़े थे, सूनी सूनी राह में, 

जी उठे हम जबसे तेरी बांह आई  बांह में, 

बह उठा नैनों से काजल, ना जा रे ना जा, रोको कोई । 

ओ बसंती पवन पागल—- 

याद कर तूने कहा था, प्यार से संसार है, 

हम जो हारे, दिल की बाज़ी, ये तेरी ही हार है, 

सुन ले क्या कहती है पायल, ना जा रे ना जा, रोको कोई । 

ओ बसंती पवन पागल—- । 

चलिए इस गीत के बहाने हम कुछ देर के लिए सादगी, सरल हृदयता और भोलेपन की जय-जयकार करते हैं, बाकी दुनिया तो वैसे ही चालाकी से चलती रहेगी।

नमस्कार।

============


2 responses to “144. बसंती पागल पवन – राज कपूर”

  1. Bahut bariya 🙂

    Like

    1. Thanks dear.

      Like

Leave a reply to samaysakshi Cancel reply