Category: Uncategorized
-
तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी!
चराग़ों की लौ से सितारों की ज़ौ तक, तुम्हें मैं मिलूँगा जहाँ रात होगी| बशीर बद्र
-
तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी!
मैं हर हाल में मुस्कुराता रहूँगा, तुम्हारी मोहब्बत अगर साथ होगी| बशीर बद्र
-
एक चाय की चुस्की!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक सुंदर नवगीत, बिना किसी भूमिका के प्रस्तुत कर रहा हूँ|| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत – एक चाय की चुस्कीएक कहकहाअपना तो इतना सामान ही रहा । चुभन और दंशनपैने यथार्थ केपग-पग पर घेर रहेप्रेत स्वार्थ…
-
ये ख़ाक-ए-रहगुज़र फिर भी!
लिपट गया तिरा दीवाना गरचे मंज़िल से, उड़ी उड़ी सी है ये ख़ाक-ए-रहगुज़र फिर भी| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
नज़र है तिरी नज़र फिर भी!
ख़राब हो के भी सोचा किए तिरे महजूर, यही कि तेरी नज़र है तिरी नज़र फिर भी| फ़िराक़ गोरखपुरी