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निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया!
वो करें भी तो किन अल्फ़ाज़ में तेरा शिकवा, जिनको तेरी निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी
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दहर से आज़ाद किया!
सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उसने ये इरशाद किया, जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया| जोश मलीहाबादी
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वंदना!
एक बार फिर मैं आज हिन्दीदेश के राष्ट्रकवि के रूप में जाने गए, स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी का एक सुंदर वंदना गीत शेयर कर रहा हूँ|, स्वर्गीय द्विवेदी जी ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन तथा गांधी जी के बारे में अनेक महत्वपूर्ण कविताएं लिखी थीं, मैंने उनकी बहुत सी कविताएं पहले भी शेयर की हैं,…
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तुझसे कहा ना बहुत हुआ!
लो फिर तिरे लबों पे उसी बेवफ़ा का ज़िक्र, अहमद-‘फ़राज़’ तुझसे कहा ना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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तेरा ठिकाना बहुत हुआ!
क्या क्या न हम ख़राब हुए हैं मगर ये दिल, ऐ याद-ए-यार तेरा ठिकाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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मिलना मिलाना बहुत हुआ!
अब तक तो दिल का दिल से तआ’रुफ़ न हो सका, माना कि उससे मिलना मिलाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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जान से जाना बहुत हुआ!
अब क्यूँ न ज़िंदगी पे मोहब्बत को वार दें, इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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रब्त बढ़ाना बहुत हुआ!
अब हम हैं और सारे ज़माने की दुश्मनी, उससे ज़रा सा रब्त बढ़ाना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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वाक़िए का फ़साना बहुत हुआ!
हम ख़ुल्द से निकल तो गए हैं पर ऐ ख़ुदा, इतने से वाक़िए का फ़साना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़
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ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ!
उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ, अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ| अहमद फ़राज़