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तुझे क्या हमने समझाया न था!
क्या मिला आख़िर तुझे सायों के पीछे भाग कर, ऐ दिल-ए-नादाँ तुझे क्या हमने समझाया न था| क़तील शिफ़ाई
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यूँ तो पहले हमको तरसाया न था!
सुर्ख़ आहन पर टपकती बूँद है अब हर ख़ुशी, ज़िंदगी ने यूँ तो पहले हमको तरसाया न था| क़तील शिफ़ाई
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छाए थे बादल औ कहीं साया न था!
दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था, इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था| क़तील शिफ़ाई
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तस्वीर अधूरी रहनी थी!
आज एक पुरानी पोस्ट फिर से शेयर कर रहा हूँ| हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते…
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तुमने मुझे बर्बाद किया!
मुझको तो होश नहीं तुमको ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी
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लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया!
मेरी हर साँस है इस बात की शाहिद ऐ मौत, मैंने हर लुत्फ़ के मौक़े पे तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी
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मुझसे कुछ इरशाद किया!
इतना मानूस हूँ फ़ितरत से कली जब चटकी, झुक के मैंने ये कहा मुझसे कुछ इरशाद किया| जोश मलीहाबादी
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बहुत देर में बर्बाद किया!
इसका रोना नहीं क्यूँ तुम ने किया दिल बर्बाद, इसका ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया| जोश मलीहाबादी
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क्या आपने इरशाद किया!
ऐ मैं सौ जान से इस तर्ज़-ए-तकल्लुम के निसार, फिर तो फ़रमाइए क्या आपने इरशाद किया| जोश मलीहाबादी
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चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया!
दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया| जोश मलीहाबादी