Category: Uncategorized
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सतरंगी तितली!
आज एक बार फिर मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर नवगीत शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी उल्लेख किया है रंजक जी को काव्य-पाठ करते हुए सुनने का अनुभव बहुत सुंदर होता था और मेरा सौभाग्य है कि मुझे यह अवसर अनेक बार मिला है| मैंने पहले…
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नज़र की शरारत कहाँ कहाँ!
होश-ओ-जुनूँ भी अब तो बस इक बात हैं ‘फ़िराक़,’ होती है उस नज़र की शरारत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ!
हर गाम पर तरीक़-ए-मोहब्बत में मौत थी, इस राह में खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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तेरी चश्म-ए-इनायत कहाँ कहाँ!
अब इम्तियाज़-ए-इश्क़-ओ-हवस भी नहीं रहा, होती है तेरी चश्म-ए-इनायत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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उठाई नदामत कहाँ कहाँ!
दुनिया से ऐ दिल इतनी तबीअ’त भरी न थी, तेरे लिए उठाई नदामत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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तेरी ज़रूरत कहाँ कहाँ!
जैसे फ़ना बक़ा में भी कोई कमी सी हो, मुझको पड़ी है तेरी ज़रूरत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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याद वो सूरत कहाँ कहाँ!
फ़र्क़ आ गया था दौर-ए-हयात-ओ-ममात में, आई है आज याद वो सूरत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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अदा की शिकायत कहाँ कहाँ!
बेगानगी पर उसकी ज़माने से एहतिराज़, दर-पर्दा उस अदा की शिकायत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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कितने दिन चलेगा!
लीजिए एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि, गीतकार, जिन्होंने साहित्य जगत और हमारी फिल्मों को भी अनेक अमर रचनाएं दी हैं और जिनको हम गीतों के राजकुंवर के नाम से जानते थे, ऐसे स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| मैंने पहले भी नीरज जी के बहुत से गीत…
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ये मसर्रत कहाँ कहाँ!
नैरंग-ए-इश्क़ की है कोई इंतिहा कि ये, ये ग़म कहाँ कहाँ ये मसर्रत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी