Category: Uncategorized
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अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते!
पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी, आँखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते| बशीर बद्र
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समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते!
होंठों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते, साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते| बशीर बद्र
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मुझे अफ़सोस है!
आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय कवियों में से एक रहे स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, भवानी दादा की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें कवि ने एक अलग तरह का विचार दिया…
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सजाने को मुसीबत नहीं मिलती!
निकला करो ये शम्अ लिए घर से भी बाहर, कमरे में सजाने को मुसीबत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
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वैसे भी फ़ुर्सत नहीं मिलती!
हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत, रोने की यहाँ वैसे भी फ़ुर्सत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
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जिससे तिरी सूरत नहीं मिलती!
देखा है जिसे मैंने कोई और था शायद, वो कौन था जिससे तिरी सूरत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
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इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती!
दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती, ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती| निदा फ़ाज़ली
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एल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ!
बाँट के अपना चेहरा माथा आँखें जाने कहाँ गई, फटे पुराने इक एल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ| निदा फ़ाज़ली
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रस्सी पर चलती नटनी जैसी माँ!
बीवी बेटी बहन पड़ोसन थोड़ी थोड़ी सी सब में, दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ| निदा फ़ाज़ली
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घर की कुंडी जैसी माँ!
चिड़ियों की चहकार में गूँजे राधा मोहन अली अली, मुर्ग़े की आवाज़ से बजती घर की कुंडी जैसी माँ| निदा फ़ाज़ली