Category: Uncategorized
-
उसको फ़साना कौन करे!
इक दर्द है अपने दिल में भी हम चुप हैं दुनिया ना-वाक़िफ़, औरों की तरह दोहरा दोहराकर उसको फ़साना कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
फूलों का नज़ारा कौन करे!
बसने दो नशेमन को अपने फिर हम भी करेंगे सैर-ए-चमन, जब तक कि नशेमन उजड़ा है फूलों का नज़ारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
उम्मीद दोबारा कौन करे!
दिल तेरी जफ़ा से टूट चुका अब चश्म-ए-करम आई भी तो क्या, फिर ले के इसी टूटे दिल को उम्मीद दोबारा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
तिनकों पे भरोसा कौन करे!
जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे, कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
हर बार तक़ाज़ा कौन करे!
ख़ाली है मिरा साग़र तो रहे साक़ी को इशारा कौन करे, ख़ुद्दारी-ए-साइल भी तो है कुछ हर बार तक़ाज़ा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
अरमान को रुस्वा कौन करे!
जब दिल में ज़रा भी आस न हो इज़्हार-ए-तमन्ना कौन करे, अरमान किए दिल ही में फ़ना अरमान को रुस्वा कौन करे| आनंद नारायण मुल्ला
-
एक जमाने की कविता!
आज एक बार फिर मैं मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री आलोक धन्वा जी की एक रचना, पहली बार शेयर कर रहा हूँ| बाकी कविता अपना परिचय स्वयं देती है| लीजिए, प्रस्तुत श्री आलोक धन्वा जी की यह रचना- वहाँ डाल पर फल पकते थेऔर उनसे रोशनी निकलती थी हम बहुत तेज़ दौड़ते थेमैदान…
-
तलाश करो दोस्तो यहीं हूँ मैं!
ये बूढ़ी क़ब्रें तुम्हें कुछ नहीं बताएँगी, मुझे तलाश करो दोस्तो यहीं हूँ मैं| राहत इन्दौरी
-
हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूँ मैं!
यहीं हुसैन भी गुज़रे यहीं यज़ीद भी था, हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूँ मैं| राहत इन्दौरी