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किसने बाँसुरी बजाई!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि एवं नवगीतकार स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना, शेयर कर रहा हूँ| इनको साहित्य के क्षेत्र में अनेक सम्मानों के साथ ही पद्मश्री सम्मान देने की भी पेशकश की गई थी जिसको उन्होंने अस्वीकार कर दिया था| लीजिए, प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह रचना-…
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हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा| अहमद फ़राज़
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इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़!
तुम तकल्लुफ़ को भी इख़्लास समझते हो ‘फ़राज़,’ दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला| अहमद फ़राज़
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तिरे साथ एक दुनिया थी!
हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा’द ये मा’लूम, कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी| अहमद फ़राज़
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चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे!
और ‘फ़राज़’ चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे, माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया| अहमद फ़राज़