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शक्ति या सौन्दर्य!
आज एक बार फिर मैं देश के राष्ट्रकवि और हिन्दी के एक श्रेष्ठतम कवियों में से एक, स्वर्गीय रामधारी सिंह “दिनकर” जी की एक ओजस्वी रचना शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी का अपना नाम ही सूर्य के तेज को प्रकट करता है, उनके बारे में कुछ कहना सूर्य को दिया दिखाना होगा| लीजिए, प्रस्तुत…
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वजूद उसका चमकता है बहुत!
तीरगी हो तो वजूद उसका चमकता है बहुत, ढूँढ तो लूँगा उसे ‘नूर’ मगर शाम के बाद| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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बहुत अपने से डर शाम के बाद!
यही मिलने का समय भी है बिछड़ने का भी, मुझको लगता है बहुत अपने से डर शाम के बाद| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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नहीं अपनी ख़बर शाम के बाद!
मेरे बारे में कोई कुछ भी कहे सब मंज़ूर, मुझको रहती ही नहीं अपनी ख़बर शाम के बाद| कृष्ण बिहारी ‘नूर’