Category: Uncategorized
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तलाश में सहर बार बार गुज़री है!
तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है, तलाश में है सहर बार बार गुज़री है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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हर सदा पर बुलाती रही रात भर!
जो न आया उसे कोई ज़ंजीर-ए-दर, हर सदा पर बुलाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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कोई क़िस्सा सुनाती रही रात भर!
फिर सबा साया-ए-शाख़-ए-गुल के तले, कोई क़िस्सा सुनाती रही रात भर| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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अपने आप में!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के अपनी किस्म के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा की कविताओं को पढ़ना अपने आप में एक अलग ही किस्म के अनुभव से गुजरना होता है| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने…
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मेहर-ओ-माह को पैमाना हम!
या जगा देते हैं ज़र्रों के दिलों में मय-कदे, या बना लेते हैं मेहर-ओ-माह को पैमाना हम| अली सरदार जाफ़री