Category: Uncategorized
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हमारे शहर में काबुल के आ गए!
अनजाने साए फिरने लगे हैं इधर उधर, मौसम हमारे शहर में काबुल के आ गए| राहत इन्दौरी
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बंद ख़्वाब अगर खुल के आ गए!
नींदों से जंग होती रहेगी तमाम उम्र, आँखों में बंद ख़्वाब अगर खुल के आ गए| राहत इन्दौरी
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अपने से मिल-जुल के आ गए!
मस्जिद में दूर दूर कोई दूसरा न था, हम आज अपने आप से मिल-जुल के आ गए| राहत इन्दौरी
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सिपाही मोम के थे घुल के आ गए!
सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवक़ूफ़, सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए| राहत इन्दौरी
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सहनशीलता!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी हास्य कविता सम्राट माने जाने वाले स्वर्गीय काका हाथरसी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| ये कविता उनके जीवन काल की है तो ज़ाहिर है इसमें की गए संदर्भ भी उस समय के ही हैं| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय काका हाथरसी जी की यह कविता –…
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शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए!
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए, कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए| राहत इन्दौरी