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इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
किस तरह करें तुझ से गिला तेरे सितम का, मदहोश इशारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
इस डूबते सूरज से तो उम्मीद ही क्या थी, हँस हँस के सितारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
तूफ़ान का शेवा तो है कश्ती को डुबोना, ख़ामोश किनारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है!
पुर-कैफ़ बहारों ने भी दिल तोड़ दिया है, हाँ उनके नज़ारों ने भी दिल तोड़ दिया है| महेश चंद्र नक़्श
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वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ!
ख़ुद को माज़ी में रखूँ हाल में रहते हुए भी, नए वक़्तों के ख़यालात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी
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उनसे मैं शिकायात न लिखने पाऊँ!
शुक्र ही शुक्र लिखे जाऊँ मैं उनके हक़ में, कभी उनसे मैं शिकायात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी
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उनकी मगर मात न लिखने पाऊँ!
जीत पर उनकी लगा दूँ मैं क़सीदों की झड़ी, मात को उनकी मगर मात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी
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मिरे हाथ न लिखने पाऊँ!
सोच तो लेता हूँ क्या लिखना है पर लिखते समय, काँपते क्यूँ है मिरे हाथ न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी
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उठती है वो बात न लिखने पाऊँ!
बस क़लम-बंद किए जाऊँ मैं उनकी हर बात, दिल से जो उठती है वो बात न लिखने पाऊँ| राजेश रेड्डी