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बाँच ली मैंने व्यथा!
आज मैं छायावाद युग की प्रमुख कवियित्री और देखा जाए तो हिन्दी साहित्य की सबसे बड़ी महिला कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| महादेवी वर्मा जी के गीतों में करुणा और संवेदनाओं के अनेक स्तरों का हम अनुभव कर सकते हैं| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी…
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बैठे हैं छुप के कहाँ ख़ुदा जाने!
हुआ है हुक्म कि ‘कैफ़ी’ को संगसार करो, मसीह बैठे हैं छुप के कहाँ ख़ुदा जाने| कैफ़ी आज़मी
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आज तलब कर लिया है सहरा ने!
बहार आए तो मेरा सलाम कह देना, मुझे तो आज तलब कर लिया है सहरा ने| कैफ़ी आज़मी
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तोड़े हैं यारों ने आज पैमाने!
जहाँ से पिछले पहर कोई तिश्ना-काम उठा, वहीं पे तोड़े हैं यारों ने आज पैमाने| कैफ़ी आज़मी